Spread the love
Test Post 02

शब्द की भावना

शब्द ही ब्रहमा, शब्द ही विष्णु, शब्द ही महेश है।

शब्द ही सुख, शब्द ही समृधि, शब्द ही कलेश है।

शब्द ही आशा, शब्द ही अभिलाषा, शब्द ही उपदेश है।

शब्द ही विचार, शब्द ही प्रचार, शब्द ही प्रहार है।

शब्द ही मान, शब्द ही सम्मान, शब्द ही अभिमान है।

शब्द ही ज्ञान, शब्द ही प्रमाण, शब्द ही पहचान है।


- रचनाकार : प्रसेनजीत
Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Spread the love